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जयपुर नर्सिंगकर्मी आत्महत्या मामला: SMS अस्पताल पहुंचे हनुमान बेनीवाल, सरकार से मांगा जवाब

जयपुर नर्सिंगकर्मी आत्महत्या मामला: SMS अस्पताल पहुंचे हनुमान बेनीवाल, सरकार से मांगा जवाब


राजधानी जयपुर में संविदा नर्सिंगकर्मी दीपक खारवाल की आत्महत्या के बाद प्रदेश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। नौकरी समाप्त होने के बाद मानसिक तनाव से जूझ रहे नर्सिंगकर्मी की मौत ने संविदा कर्मचारियों के भविष्य और सरकारी नीतियों को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बीच नागौर से सांसद Hanuman Beniwal देर शाम सवाई मानसिंह अस्पताल पहुंचे और पीड़ित परिवार तथा प्रदर्शनकारी कर्मचारियों के समर्थन में खुलकर सामने आए।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, 25 वर्षीय दीपक खारवाल जयपुर के महिला चिकित्सालय सांगानेरी गेट में कार्यरत थे। हाल ही में एसएमएस मेडिकल कॉलेज और उससे जुड़े अस्पतालों में कार्यरत बड़ी संख्या में संविदा नर्सिंगकर्मियों को सेवा से हटाया गया था। इसके विरोध में कर्मचारी लगातार प्रदर्शन कर रहे थे।

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प्रदर्शन के दौरान दीपक भी अपने साथियों के साथ मौजूद थे। बाद में वे अपने कमरे पर लौटे, जहां उन्होंने कथित रूप से जहरीला पदार्थ सेवन कर लिया। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।

अस्पताल परिसर में बढ़ा आक्रोश

दीपक की मौत की खबर फैलते ही नर्सिंग कर्मचारियों में भारी आक्रोश देखने को मिला। बड़ी संख्या में कर्मचारी एसएमएस अस्पताल पहुंचे और प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। कुछ समय के लिए अस्पताल की आपातकालीन सेवाएं भी प्रभावित हुईं। प्रदर्शनकारी मृतक के परिवार को न्याय, मुआवजा और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे।

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देर शाम अस्पताल पहुंचे हनुमान बेनीवाल

राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के बीच सबसे अधिक चर्चा सांसद हनुमान बेनीवाल की मौजूदगी को लेकर रही। बेनीवाल सीधे एसएमएस अस्पताल की मॉर्च्युरी के बाहर पहुंचे, जहां मृतक के परिजन और कर्मचारी धरने पर बैठे हुए थे।

उन्होंने परिजनों से मुलाकात कर उनकी बात सुनी और प्रशासनिक रवैये पर सवाल उठाए। बेनीवाल ने कहा कि सरकार को पहले पीड़ित परिवार से संवाद करना चाहिए और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

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कोविड में सेवा देने वालों के साथ अन्याय?

हनुमान बेनीवाल ने कहा कि कोविड महामारी के दौरान जिन संविदा नर्सिंगकर्मियों ने अस्पतालों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, उन्हें अचानक नौकरी से हटाना उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने इसे संविदा कर्मचारियों के साथ अन्याय बताते हुए सरकार की नीति की आलोचना की।

सांसद ने मृतक के परिवार को आर्थिक सहायता देने, आश्रित को सरकारी नौकरी उपलब्ध कराने तथा पूरे मामले की जिम्मेदारी तय करने की मांग उठाई।

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कर्मचारियों की प्रमुख मांगें

प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि हटाए गए नर्सिंगकर्मियों को वैकल्पिक नियुक्ति दी जाए और भविष्य में भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जाए। साथ ही मृतक के परिवार को उचित आर्थिक सहायता और सुरक्षा प्रदान की जाए।

राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बना मामला

दीपक खारवाल की मौत केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं है, बल्कि यह संविदा कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षा, रोजगार नीति और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे बड़े मुद्दों को भी सामने लाती है।

इस मामले में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दी है, लेकिन हनुमान बेनीवाल की अस्पताल पहुंचकर की गई सक्रिय भागीदारी ने इस प्रकरण को राजनीतिक रूप से और अधिक चर्चा में ला दिया है।

अब सभी की नजर राज्य सरकार के अगले कदम पर है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कर्मचारियों और मृतक परिवार की मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है और क्या इस घटना से जुड़े सवालों का संतोषजनक समाधान निकल पाता है।


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