हनुमान बेनीवाल की यूपी में एंट्री की चर्चा: दिल्ली में हुई मुलाकात के दौरान क्या देखने को मिला?
7 August 2026 12:03 IST
| लेखक:
The Pillar Team
Politics
दिल्ली में नागौर सांसद एवं राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के प्रमुख हनुमान बेनीवाल से मुलाकात के दौरान एक दिलचस्प राजनीतिक माहौल देखने को मिला। इस मुलाकात में सबसे अधिक ध्यान आकर्षित करने वाली बात यह रही कि वहां बड़ी संख्या में उत्तर प्रदेश से आए लोग मौजूद थे। यह अनुभव कई मायनों में अलग था, क्योंकि सामान्य धारणा यह रहती है कि हनुमान बेनीवाल से मिलने वालों में राजस्थान के लोगों की संख्या अधिक होगी।
मौके पर मौजूद लोगों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ-साथ पूर्वांचल क्षेत्र के लोग भी शामिल थे। सामाजिक दृष्टि से भी वहां विविधता दिखाई दी। केवल जाट समाज ही नहीं, बल्कि ब्राह्मण, ठाकुर, वैश्य, कायस्थ, ओबीसी तथा अन्य वर्गों के लोग भी अपनी-अपनी बात रखने पहुंचे थे।
बातचीत के दौरान कुछ लोगों ने बताया कि वे पहले समाजवादी पार्टी या भारतीय जनता पार्टी से जुड़े रहे हैं। कुछ लोगों का दावा था कि वे विधानसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं। इन लोगों का कहना था कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में वे उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नए विकल्प की तलाश कर रहे हैं।
कई उपस्थित लोगों ने अपनी व्यक्तिगत राय व्यक्त करते हुए कहा कि यदि हनुमान बेनीवाल वर्ष 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के बैनर तले उतरते हैं, तो वे उनका समर्थन करने पर विचार करेंगे। उनका मानना था कि उन्हें ऐसा नेता चाहिए जो जनता के बीच लगातार सक्रिय रहे, लोगों की समस्याएं सुने, उपलब्ध रहे और जनहित के मुद्दों को सड़क से लेकर संसद तक उठाए।
चर्चा के दौरान यह भी कहा गया कि हनुमान बेनीवाल की कार्यशैली राजस्थान में अलग पहचान रखती है। उपस्थित कुछ लोगों का मत था कि यदि ऐसी शैली उत्तर प्रदेश में देखने को मिले तो यह राज्य की राजनीति में एक नया विकल्प बन सकती है। हालांकि, यह पूरी तरह उपस्थित लोगों की व्यक्तिगत राय थी।
बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि यदि भविष्य में RLP उत्तर प्रदेश में चुनाव लड़ने का निर्णय लेती है, तो क्या पार्टी को अकेले मैदान में उतरना चाहिए या किसी बड़े गठबंधन के साथ चुनाव लड़ना चाहिए। इस विषय पर अलग-अलग मत सामने आए। कुछ लोगों का मानना था कि पार्टी को पहले संगठन विस्तार पर ध्यान देना चाहिए, जबकि कुछ का कहना था कि यदि विभिन्न सामाजिक वर्गों का समर्थन मिलता है तो अकेले चुनाव लड़ना भी संभव हो सकता है।
बताया गया कि इस विषय पर आगे की चर्चा के लिए 12 तारीख को एक और बैठक प्रस्तावित है। हालांकि, इस बैठक में क्या निर्णय होगा, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि अब तक हनुमान बेनीवाल या राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी की ओर से उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 लड़ने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इसलिए इस समय जो चर्चाएं चल रही हैं, उन्हें राजनीतिक अटकलों, समर्थकों की राय और अनौपचारिक चर्चाओं के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
यदि भविष्य में पार्टी कोई औपचारिक निर्णय लेती है, तो उसका प्रभाव उत्तर प्रदेश की राजनीति पर कितना पड़ेगा, यह चुनावी परिस्थितियों, संगठन की तैयारी, उम्मीदवारों के चयन और मतदाताओं के रुझान पर निर्भर करेगा।
अब सवाल जनता के सामने है। यदि हनुमान बेनीवाल उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते हैं, तो क्या उन्हें अकेले चुनाव लड़ना चाहिए? क्या उन्हें किसी गठबंधन का हिस्सा बनना चाहिए? या पहले संगठन को मजबूत करके फिर चुनावी मैदान में उतरना चाहिए?
इन सभी सवालों के जवाब आने वाले समय में राजनीतिक घटनाक्रम के साथ स्पष्ट होंगे। फिलहाल इतना तय है कि इस तरह की चर्चाओं ने उत्तर प्रदेश और राजस्थान—दोनों राज्यों के राजनीतिक हलकों में उत्सुकता जरूर बढ़ा दी है।
(अस्वीकरण: यह लेख लेखक के प्रत्यक्ष अनुभव, लोगों से हुई बातचीत और उनके द्वारा व्यक्त विचारों पर आधारित है। इसमें व्यक्त दावे संबंधित व्यक्तियों के हैं। हनुमान बेनीवाल या राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी द्वारा उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 लड़ने की कोई आधिकारिक घोषणा इस लेख के प्रकाशन तक नहीं हुई है।)
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