भारत–अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ देशव्यापी संयुक्त संघर्ष का ऐलान, 9 मार्च को जंतर-मंतर पर मजदूर–किसान संसद
25 February 2026 17:23 IST
| लेखक:
The Pillar Team
Delhi

Samyukt Kisan Morcha (SKM) ने भारत–अमेरिका व्यापार समझौते सहित कई लंबित मुद्दों पर “जीत तक संघर्ष” का देशव्यापी आह्वान किया है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि जब तक प्रमुख मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक स्वतंत्र और संयुक्त—दोनों तरह के आंदोलनों को तेज किया जाएगा।
9 मार्च: जंतर-मंतर पर मजदूर–किसान संसद
SKM ने घोषणा की है कि संसद के अगले सत्र के पहले दिन, 9 मार्च को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और कृषि मजदूर संगठनों के साथ मिलकर “मजदूर–किसान संसद” आयोजित की जाएगी। यह कार्यक्रम सरकार की नीतियों पर प्रत्यक्ष जनमत और साझा रणनीति तय करने का मंच होगा।
10 मार्च से 13 अप्रैल: देशभर में महापंचायतें
10 मार्च से 13 अप्रैल (जलियांवाला बाग दिवस) तक देशव्यापी महापंचायतों का दौर चलेगा, जिसकी शुरुआत पंजाब के बरनाला से होगी। इन महापंचायतों में भारत–अमेरिका व्यापार समझौते, बिजली बिल, बीज विधेयक, चार श्रम संहिताओं और कृषि से जुड़े अन्य कानूनों के प्रभावों पर चर्चा की जाएगी।
प्रमुख मांगें क्या हैं?
SKM ने जिन मांगों को संघर्ष का केंद्र बताया है, उनमें शामिल हैं:
• भारत–अमेरिका व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर न करना
• MSP@C2+50% की कानूनी गारंटी
• किसानों की कर्जमाफी
• 2013 के LARR अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन
• बिजली बिल, बीज विधेयक और चार श्रम संहिताओं का विरोध
संगठन का कहना है कि ये मुद्दे सीधे तौर पर किसानों और मजदूरों की आजीविका से जुड़े हैं और इन पर व्यापक सार्वजनिक बहस जरूरी है।
राष्ट्रपति को खुले पत्र और गांव-गांव अभियान
9 मार्च तक गांवों में जनसभाओं के माध्यम से अभियान चलाया जाएगा। किसानों द्वारा डाकघरों तक जुलूस निकालकर राष्ट्रपति को खुले पत्र भेजे जाएंगे। इन पत्रों में वाणिज्य मंत्री Piyush Goyal को पद से हटाने, प्रधानमंत्री को व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर न करने का निर्देश देने तथा वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman से गेहूं-धान बोनस संबंधी निर्णय वापस लेने की मांग शामिल होगी।
राज्यों से संवाद और संघीय अधिकारों का सवाल
27 फरवरी के बाद SKM प्रतिनिधिमंडल विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों और विपक्षी नेताओं से मुलाकात करेगा। संगठन ने केंद्र द्वारा कथित सत्ता-केंद्रीकरण का विरोध, राज्यों के संघीय अधिकारों की रक्षा और जीएसटी ढांचे में संशोधन की मांग उठाने की बात कही है।
पुलिस कार्रवाई की निंदा
बैठक में पंजाब, ओडिशा और महाराष्ट्र में किसान आंदोलनों पर हुई पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए प्रस्ताव पारित किया गया। SKM का कहना है कि लोकतांत्रिक विरोध पर दमन उचित नहीं है।
नेतृत्व और समन्वय
बैठक की अध्यक्षता सात सदस्यीय अध्यक्षमंडल ने की, जिसमें प्रमुख किसान नेता Rakesh Tikait और Joginder Singh Ugrahan सहित अन्य प्रतिनिधि शामिल थे। नौ राज्यों से 150 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया।साथ ही, MSP से जुड़े मुद्दों पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित समिति से संवाद के लिए 15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल गठित करने का निर्णय भी लिया गया।
निष्कर्ष
संयुक्त किसान मोर्चा का यह ऐलान आने वाले हफ्तों में किसान-मजदूर राजनीति को नई दिशा दे सकता है। 9 मार्च की मजदूर–किसान संसद और उसके बाद होने वाली महापंचायतें इस संघर्ष की दिशा और तीव्रता तय करेंगी।

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